सागर नितल प्रसरण सिद्धांत

इस सिद्धांत का प्रतिपादन 1961 – 62 में हेरी हेन्स ने किया था| हेरी हेन्स ने अपने विश्लेषण में पाया की मध्य महासागरीय कतकों के साथ-साथ ज्वालामुखी उद्गार क्रिया सामान्य क्रिया है, जिससे अत्यधिक मात्रा में लावा बाहर आता है, तथा भू-पर्पटी का निर्माण होता है| महासागरीय कटक के मध्य भाग के दोनो ओर समान दुरी पर सामान आयु की चट्टानें पायी जाती है| कटकों से दूर जाने पर चट्टानों की आयु में बृद्धि होती है, जबकि कटको के समीप नवीन सैलें प्राप्त होती है|

हेरी-हेन्स के अनुसार महासागरीय कटकों के मध्य ज्वालामुखी उद्भेदन से काटकों के बीच की दरार का भराव लगातार लावा से होने के कारण महासागरीय पर्पटी का दोनों ओर विस्थापन हो रहा है| फलतः महासागरीय तल का विस्तार हो रहा है|

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