Plate Tectonics Theory

प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत

सन 1987 में मेकेंजी, मार्गन व पारकर ने स्वतंत्र रूप से उपलब्ध विचारों को संबवित कर प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत प्रस्तुत किया| एक विवर्तनिक प्लेट अथवा लिथोस्फेरिक प्लेट ठोस चट्टान का विशाल अनियमित आकार का खंड है, जो महाद्वीपीय एवं महासागरीय क्रस्ट से मिलकर बना है| ये प्लेट दुर्बलता मंडल पर क्षैतिज दिशा में चलायमान है| प्लेट की मोटाई महासागरीय भागों पर 100km तक तथा महाद्वीपीय भाग में 200km तक होती है| एक प्लेट को महासागरीय अथवा महाद्वीपीय संज्ञा देना इस बात पर निर्भर करता है कि उस प्लेट का अधिकांश भाग महासागरीय है अथवा महाद्वीपीय|

जैसे – प्रशांत महासागरीय प्लेट, यूरेशियाई महाद्वीपीय प्लेट|

पृथ्वी पर सात मुख्य प्लेट एवं कुछ छोटी प्लेंटे विद्यमान है-

  • यूरेशियाई महाद्वीपीय प्लेट
  • प्रशांत महासागरीय प्लेट
  • अटलांटिक प्लेट
  • उत्तरी अमेरिकी प्लेट
  • दक्षिणी अमेरिकी प्लेट
  • अफ्रीकी प्लेट
  • इंडो-ऑस्ट्रेलियन – न्यूजीलैंड प्लेट

कुछ महत्वपूर्ण छोटे प्लेट

  • कोकस प्लेट – यह प्लेट मध्यवर्ती अमेरिका व प्रशांत महासागरीय प्लेट के मध्य अवस्थित है|
  • नाजका प्लेट – यह प्लेट दक्षिण अमेरिका व प्रशांत महासागरीय प्लेट के मध्य स्थित है|
  • अरेबियन प्लेट – इसमें अधिकतर अर्ब प्रायद्वीप का भू – भाग सम्मलित है|
  • फिलीपीन प्लेट – यह एशिया (यूरेशिया) व प्रशांत महासागरीय प्लेट के मध्य स्थित है|
  • केरेबियन प्लेट – यह न्यू-गिनी के उत्तर में फिलीपीन व इंडो ऑस्ट्रिलियन के मध्य स्थित है|
  • फ्यूजी प्लेट – यह ओस्ट्रिलिया के उत्तर पूर्व में स्थित है|   

प्लेट सीमाएं

प्लेटो की परस्पर गति के कारण दो या दो से अधिक प्लेटों के मध्य प्लेट सीमाओ का विकास होता है| ये अपने व्यवहार के आधार पर तीन प्रकार की हो सकती है|

अपसारी सीमा

जब दो प्लेट एक दूसरे से विपरीत दिशा में अलग हटती है व नई पर्पटी का निर्माण करती है, उन्हें अपसारी प्लेट के अंदर रखा जाता है| वह स्थान जहा से प्लेट एक दूसरे से दूर हटती है, प्रसारी (spreading) कहलाती है| यहाँ सामन्यतर ज्वालामुखी क्रियाए होती रहती है| परन्तु भूकंप बहुत कम गति का आता है|

अभिसारी सीमा

जब एक प्लेट दूसरी प्लेट की ओर संचरण करती है तो एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धस जाती है, वह स्थान जहा प्लेट धसती है प्रविष्ठंन क्षेत्र (subduction zone) कहलाता है| अभिसरण सीमायें प्लेटों के आधार पर तीन प्रकार की हो सकती है-

  • महासागरीय महासागरीय अभिसारी सीमा
  • महासागरीय महाद्वीपीय अभिसारी सीमाएं
  • महाद्वीपीय महाद्वीपीय अभिसारी सीमा

महासागरीय महासागरीय अभिसारी सीमा

दो महासागरीय प्लेटो की अभिसरण सीमा पर अधिक घनत्व वाली प्लेट का प्रविष्ठन हो जाता है| जिस कारण उस क्षेत्र में ज्वालामुखी क्रियाएं तथा बलित पर्वत बनते है, तथा अवशिष्ट क्षेत्र में गर्त का निर्माण होता है|

महासागरीय महाद्वीपीय अभिसारी सीमाएं

जब महासागरीय तथा महाद्वीपीय प्लेटों का अभिसरण होता है, तो उस क्षेत्र में अधिक घनत्व वाली महासागरीय प्लेट का प्रविष्टन होता है तथा महाद्वीपीय खंड पर ज्वालामुखी क्रियाएं सम्पन्न होती है| इस क्षेत्र में भी बलित पर्वतों का निर्माण तथा गहरे गर्तों का निर्माण होता है|

महाद्वीपीय महाद्वीपीय अभिसारी सीमा

वास्तव में इस सीमाओं का विकास महासागरीय सीमाओं से होते हुए महाद्वीपीय सीमाओं तक होता है| इन सीमाओं की उत्पत्ति महासागरीय खंडों के पूर्णतया लुप्त होने के बाद होती है इन क्षेत्रों में ज्वालामुखी क्रियाएं समाप्त हो चुकी होती हैं, तथा बलित पर्वतों का विकास होता है| प्लेटों की गति कारण भूकंप की संभवना बानी रहती है| उदाहरण – भारतीय प्लेट व युरोपियन प्लेट की अभिसीमा|

संरक्षी सीमा (रूपांतरण सीमा)

वह प्लेट सीमा जहा न तो नई पर्पटी का निर्माण होता है और न ही प्लेट का विकास| इसका कारण इस सीमा पर प्लेटों का एक दूसरे के साथ क्षैतिज दिशा मे विस्थापित होता है| इस सीमा के विकास हेतु प्रमुख कारण पृथ्वी का घूर्णन व सभी क्षेत्रों में अपसरण बल कि असमानता है|

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