भूसंचलन

आंतरिक (अंतर्जात बल)

पृथ्वी के आंतरिक भाग से निकलने वाली ऊर्जा भू आकृतिक प्रक्रियाओं के लिए मूल स्रोत होती है| ये ऊर्जा रेडिओधर्मी क्रियाओं घूर्णन तथा अवशिष्ट  ऊर्जा के द्वारा उत्पन्न  होती है| इन प्रक्रियाओं के अंतर्गत ज्वालामुखी, भूकंप तथा प्लेट विवर्तनिकी क्रियाएं होती है|

बलन

धरातली चट्टानों में संपीड़न के फलस्वरूप लहरों के रूप में पड़ने वाले मोड़ों को बलन की संज्ञा दी जाती है| हिमालय, एल्प्स, रॉकीज, एण्डीज, बलित पर्वतों के उदाहरण हैं|

बलन के प्रकार

(1) सम्मित बल

ऐसा बलन जिसमें दोनों भुजाओं का झुकाव व ढाल एक सामान होता है, सम्मित बलन कहलाता है|

उदाहरण- जूरा पर्वतमाला (स्विट्ज़रलैण्ड)

(2) असममित बलन

जब बलन की दोनों भुजाओं की लम्बाई एवं ढ़ाल आसमान होती है, तो उसे असममित बलन कहा जाता है|

जैसे – ब्रिटेन का दक्षिणी पेनाइन पर्वत

(3) एकनत बलन

जब किसी बलन की एक भुजा तो समान झुकाव व ढाल वाली होती है, जबकि दुसरी भुजा उस पर समकोण बनाती है| तब ऐसे बलन को एकनत कहा जाता है|

जैसे- ऑस्ट्रेलिया का ग्रेट डिवाइडिंग रेंज (बृहद विभाजन पर्वत श्रेणी)

(4) समनत बलन

जब बलन की दोनों भुजाएं झुकी हुई तथा समानांतर से मुड़ी हुई हो तो ऐसे बलन को समनत बलन कहा जाता है|

जैसे – पाकिस्तान काला चिंता पर्वत श्रेणी|

(5) परिबलित बलन

अत्यधिक संपीड़न के कारण जब बलन की एक भुजा दूसरी भुजा पर क्षैतिज दिशा में तथा समानांतर रूप में स्थापित हो जाती है, तो उसे परिबलित बलन की संज्ञा दी जाती है|

(6) प्रतिबलन

जब परिबलित बलन में नीचे  भुजा टूटने के बाद ऊपर की ओर विस्थापित हो जाती है, उस भुजा को प्रतिबलित बलन कहा जाता है|

(7) बंद बलन

जब बलन की दो भुजाओं के मध्य का कोण न्यूनकोण होता है तो ऐसे बलन को बंद बलन की संज्ञा दी जाती है|

(8) खुला बलन

जब बलन की दो भुजाओं का मध्य का कोण अधिकोण होता है, तो उसे ऐसे बलन को खुला बलन कहते है|

ग्रीवा खंड

जब किसी परिबलित बलन में अत्यधिक संपीड़न बल के कारण बलन की एक भुजा टूटकर दूर विस्थापित हो जाती है, तब उस विस्थापित भुजा को ग्रीवा खंड कहते है|

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