Internal structure of the earth

पृथ्वी की आतंरिक संरचना का अनुमान निम्न दो तरीको से लगाया जा सकता है –

Internal structure of the earth
प्रत्यक्ष स्रोत – ज्वालामुखी उदभेदन व खनन क्रियाओं द्वारा प्राप्त पदार्थो सके शोध द्वारा पृथ्वी के आतंरिक पदार्थो के सन्दर्भ में सूचनाएं प्राप्त की जा सकती है, परन्तु इस सूचनाओं की एक सीमा है| ये श्रोत एक सीमा से अधिक की जानकारी नहीं दे सकते है| जैसे खनन क्रिया में अभी तक हुई सबसे बड़ी खनन क्रिया दक्षिण अफ्रीका मे सोने की खान में हुई खुदाई है जो अभी तक 3 -4 किमी तक ही सम्भव हो पायी है| अगर महासागरो की बात की जय तो आर्कटिक महासागर के सबसे गहरा प्रभेदन भी महज 12 किमी है|

अप्रत्यक्ष स्रोत – इसमें हम उन सभी क्रियाओ को शामिल कर सकते है जिससे हमें पृथ्वी के आंतरिक संरचना का बोध होता है|

उल्कापिंड – उल्कापिंडो पर किये गए शोध द्वारा हम उन मूल पदार्थो के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है जिससे ब्रह्माण्ड के समस्त पिंड और हमारी पृथ्वी निर्मित हुई है|

गुरूत्वाकर्षण बल – पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल की मात्रा विभिन्न अक्षांशो पर भिन्न – भिन्न होती है| धुवो पर गुरुत्वीय बल सर्वाधिक तथा भूमध्य रेखीय क्षेत्रों पर कम होता है| पृथ्वी के विभिन्न क्षेत्रो पर घनत्व (शैलीय घनत्व) मे अंतर के कारण गुरुत्वीय बल में अंतर हो सकता है|

चुंबकत्व – पृथ्वी की आंतरिक संरचना तथा धरातल पर विद्यमान पदार्थो में भिन्न – भिन्न चुंबकत्व होता है| जिससे हम अनुमान लगा सकते है कि पृथ्वी भिन्न – भिन्न पदार्थो से मिलकर बनी है|

भूकम्पीय तरंगे – भूकंप के तरंगे प्रघातीय तरंगे होती है, जिसमे ऊर्जा तरंगे के रूप में संचरित होती है, तथा ऊर्जा का संचरण उसी प्रकार व्यवहार करती है जैसे प्रकाश की किरणे| जिस प्रकार प्रकाश की तरंगो में अपवर्तन तथा परावर्तन होता है, उसी प्रकार भूकम्पीय तरंगे भी अपवर्तित तथा परावर्तित होती है| ये ऊर्जा तरंगे भ्रंस के सहारे निकलती है| भ्रंसके दोनो ओर शैलीय (प्लेटस) के विपरीत दिशा में गति करने के कारण यहा ऊर्जा मुक्त होती है|

भूकम्पीय तरंगे दो प्रकार की होती है-

1 ). कायिक तरंगे

2 ). धरातलीय तरंगे

कायिक तरंगे (P तरंगे – Primary / प्राथमिक तरंगे ) – ये ठोस तरल दोनो में संचारित हो सकती है तथा इनकी गति सभी भूकम्पीय तरंगो से अधिक होती है| ये तरंगे ध्वनि की भाती व्यवहार करती है, अर्थात कणो की गति तरंग गति की दिशा में होती है| इस कारण ये अपने संचरण के दौरान पदार्थो के घनत्व में अंतर उत्प्न्न कर सकती है| ये अनुदैर्य तरंगे होती है|

S तरंगे – इन तरंगो की गति प तरंगो से लगभग आधी होती है| इन तरंगो में ऊर्जा कणों की गति तरंग की गति के अनुप्रस्त होती है|

L तरंगे – इनकी उत्पत्ति भूकंप के अभिकेंद्र से होती है, तथा ये सर्वाधिक विनाशक होती है| इनके दो प्रारूप होते है-

(I) रैलीय तरंगे –

(II) लव तरंगे –

रैलीय तरंगे– यह p की भाति विनाशक होती है|

लव तरंगे – इनका व्यवहार S तरंगे की भांति होता है| ये सर्वाधिक विनाशक होती है, जिससे बड़ी – बड़ी इमारतें गिर जाती है|

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