क्लोनिंग

क्लोन एक ऐसी जैविक रचना है जो एकमात्र जनक (माता या पिता) से गैर-लैंगिग विधि द्वारा उत्पादित होता है. और यह उत्पादित क्लोन अपने जनक के शारीरिक और अनुवांशिक रूप से पूर्णतः समान होता है. इस प्रकार किसी भी जीव का प्रतिरूप बनाना ही क्लोनिंग कहलाता है. इसमें प्रायः नाभिकीय स्थानांतरण तकनीक का प्रयोग किया जाता है. इस तकनीक में कोशिका के नाभिक को निकाल कर इसे नाभिक रहित अंडाणु में प्रतिस्थापित कर दिया जाता है और निषेचन क्रिया प्रारम्भ करने के लिए इसमें विद्युत प्रवाहित की जाती है. जिससे तीव्रता से कोशिका विभाजन होने लगता है. इस तकनीक के तहत पूर्ण विकसित अंडाणु को मादा के गर्भ में आरोपित कराके समरूप क्लोन प्राप्त किये है.

इसकी परंपरागत तकनीक भ्रूण क्लोनिंग या टविनिंग (tweening) रही है. जिसमे कोशिका के भ्रूण को लेकर प्रतिरूप तैयार किये जाते है.

वर्ष 1997 में डॉ. इयान विलयुत और उनके सहयोगी ने रॉसलीन इंस्टिट्यूट, एडिनबर्ग में वयस्क क्लोनिंग कर प्रयोग डॉली भेड़ के क्लोन तैयार करने में सफलता हासिल की जिसके बाद बन्दर, चूहों, बछड़ों, तथा कई अन्य जानवरों क्लोन भी सफलता पूर्वक बनाये गए.

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