HIV & AIDS

AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome)

एड्स अथवा अक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम (Acquired Immunodeficiency Syndrome) की पहचान सबसे पहले 1981 में समलिंगी पुरुषों में प्रतिरक्षण क्षमता में कमी तथा उच्च मृत्यु दर के साथ सामने आया. यह रोग वर्तमान समाज में मानव सभ्यता के समक्ष बड़ी विपदा के रूप में खड़ा है. यह लाइलाज होने के कारन ज्यादा भयावह हो गयी है.

AIDS के प्रभाव

यह एकविषाणु द्वारा उत्पन्न होता है जो शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली या इम्यून सिस्टम को क्षीण हो जाती है. प्रतिरक्षा प्रणाली कई वायरस और बैक्टीरिया से मानव शरीर को लड़ने कि क्षमता प्रदान करती है. जिसके कारण रोगी अनेक रोगों के संक्रमण का आसानी से शिकार हो जाता है अंत में मृत्यु को प्राप्त करता है.

AIDS मूल  रूप में HIV (Human Immunodeficiency Virus) संक्रमण  अंतिम अवस्था है.

HIV क्या है?

एचआईवी (Human Immunodeficiency Virus) एक वायरस है जो एड्स (AIDS) का कारण बनता है. जो शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता पर हमला कर उसे कमजोर कर देती है. जिसके कारण शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता  जाती है या क्षीण हो जाती है. मानव शरीर की रक्षा प्रणाली को प्रतिरक्षा प्रणाली या इम्यून सिस्टम कहते है. जो विभिन्न रोगों (वायरस और बैक्टीरिया) से मानव शरीर को लड़ने कि क्षमता प्रदान करती है. Human Immunodeficiency Virus (HIV) इस प्रतिरक्षा प्रणाली कि कोशिकाओं पर हामला कर इसे कमजोर कर देता है. HIV एक प्रोटीन केप्सूल होता है जिसमे RNA तथा कुछ एंजाइम पाया जाता है. यह कोशिकाएं एक प्रकार कि Red blood cells (RBC) होती है जो सी डी 4 (CD4) सेल्स के नाम से भी जानी जाती है.

HIV के प्रकार-

एचआईवी को मुख्य दो प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है जो इस प्रकार है:

HIV-1: यह प्रकार दुनिया भर में पाया जाता है और सबसे आम है.

HIV-2: ज्यादातर पश्चिम अफ्रीका, एशिया और यूरोप में पाया जाता है.

संक्रमण के कारण

HIV संक्रमण के मुख्य कारण निम्न है-

  • संभोग द्वारा (Sexual Transmission)
  • रुधिर आधान द्वारा (Blood Transfusion).
  • रोगी माँ द्वारा उसके गर्भ शिशु में.
  • वीर्य (सीमेन )और अन्य पुरुष यौन पदार्थ ( सेक्सुअल सिक्रेशन ).
  • योनि तरल पदार्थ (वजाइनल सिक्रेशन ).
  • संक्रमित माँ का दूध.

प्रारंभिक लक्षण

  • सर दर्द
  • अत्यधिक थकान
  • ग्रंथियों में सूजन
  • गले में खराश
  • चकत्ते
  • मांसपेशी में दर्द
  • रात में अधिक पसीना आना
  • एक महीने से अधिक बुखार.
  • 10 प्रतिशत से अधिक शरीर के भार कमी.

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